Saturday, May 19, 2018

जानें, शनिवार व्रत और पूजन विधि का सही तरीका !!

शनिवार व्रत पूजन

जीवन में ग्रहों का प्रभाव बहुत प्रबल माना जाता है और उस पर भी शनि ग्रह अशांत हो जाएं तो जीवन में कष्टों का आगमन शुरू हो जाता है. इसलिए शनि दोष से पीड़ित जातकों को शनिवार के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उनका पूजन और व्रत रखना
व्रत वाले दिन क्या करें :

- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहा धोकर और साफ कपड़े पहनकर पीपल के वृक्ष पर जल अर्पण करें.
- लोहे से बनी शनि देवता की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं.
- फिर मूर्ति को चावलों से बनाए चौबीस दल के कमल पर स्थापित करें.
- इसके बाद काले तिल, फूल, धूप, काला वस्त्र व तेल आदि से पूजा करें.
- पूजन के दौरान शनि के दस नामों का उच्चारण करें- कोणस्थ, कृष्ण, पिप्पला, सौरि, यम, पिंगलो, रोद्रोतको, बभ्रु, मंद, शनैश्चर.
- पूजन के बाद पीपल के वृक्ष के तने पर सूत के धागे से सात परिक्रमा करें.
- इसके बाद शनिदेव का मंत्र पढ़ते हुए प्रार्थना करें -
"शनैश्चर नमस्तुभ्यं नमस्ते त्वथ राहवे। केतवेअथ नमस्तुभ्यं सर्वशांतिप्रदो भव"॥

कितने  दिन तक करें पूजा :

इसी तरह सात शनिवार तक व्रत करते हुए शनि के प्रकोप से सुरक्षा के लिए शनि मंत्र की समिधाओं में, राहु की कुदृष्टि से सुरक्षा के लिए दूर्वा की समिधा में, केतु से सुरक्षा के लिए केतु मंत्र में कुशा की समिधा में, कृष्ण जौ, काले तिल से 108 आहुति प्रत्येक के लिए देनी चाहिए.

फिर अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराकर लौह वस्तु धन आदि का दान अवश्य करें.

व्रत के दौरान शनि चालीस का पाठ अवश्य करें और संध्या के वक्त पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
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Friday, May 18, 2018

19 मई 2018, शनिवार का पंचांग !!

शुभ विक्रम संवत- 2075, अयन- उत्तरायन, मास- ज्येष्ठ, पक्ष- शुक्ल, हिजरी सन्- 1439, मु. मास- रमजान, तारीख- 3।

दिवस तिथि- चतुर्थी।

दिवस नक्षत्र- पुनर्वसु।

शुभ समय- सुबह 7.30 से 9.00 तथा दोपहर 1.30 से 4.30 बजे तक।

दिशाशूल- पूर्व।
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19 मई 2018, शनिवार का राशिफल !!

मेष: आज आपको अजनबी लोगों का सहयोग मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में आपके पक्ष में कुछ परिवर्तन हो सकते हैं, इससे व्यथित होकर साथियों का मूड कुछ खराब हो सकता है। आप अपने सद्व्यवहार से माहौल को सामान्य बनाने में कामयाब रहेंगे।

वृषभ: कुछ आर्थिक और पारिवारिक संकोच अभी दबाव में रखेंगे। अधिक उत्साह और तत्परता से कार्य बिगड़ सकता है। शुभ संदेश भी आएगा व पुराने मित्रों से मुलाकात होगी। गलत तरीके से धन अर्जित न करें।


मिथुन: पारिवारिक विषमताएं सिर उठा सकती हैं। मान सम्मान भी बढ़ेंगे और अप्रत्याशित लाभ की प्राप्ति भी होगी। आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतें। आपके द्वारा किये गये कार्यों का विरोध होगा। परिवार की समस्याओं के संबंध में कोई गलत निर्णय लेना कठिन होगा।

कर्क: परिश्रम के बाद वांछित लाभ होगा। दूर की यात्रा भी करनी पड़ सकती है। मानसिक परेशानी के चलते मन परेशान हो सकता है। कुछ अधूरे कार्य आपको निपटाने होंगे। सुख व दुख को समान समझकर सब कुछ भाग्य पर छोड़ दें।

सिंह: सहज ही सभी काम समय पर बनते नजर आएंगे। अच्छे दिनों का संयोग मन को प्रफुल्लित करेगा। खर्च पर नियंत्रण रखना जरूरी है। व्यापार व व्यवसाय से संबंधित कईं अनुभव होंगे।

कन्या: उत्सव व त्यौहार में सम्मिलित होने के अवसर प्राप्त होंगे। अच्छे भोजन से स्वास्थ्य में वृद्धि होगी। शुभ समाचार का आना लगातार जारी रहेगा इसलिए वहीं कार्य करें जिसके बनने की उम्मीद हो।

तुला: कार्यक्षेत्र में आपकी धाक जमेगी व एक के बाद एक मामले सुलझते चले जाएंगे। समय के अनुसार चलने से आप उन्नति करेंगे वरना समय आपको पीछे छोड़ देगा।

वृश्चिक: दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। जटिल कार्यों का निष्पादन होगा और लाभदायक उपक्रमों का संचालन भी होगा। मानिसक उलझनों के कारण सिरदर्द की आकांक्षा रहेगी या फिर संतान पक्ष की चिन्ता रहेगी।

धनु: वाहन और आवास संबंधी समस्याएं सिर उठा सकती हैं। शुभ संदेश आने से उत्साह बढ़ेगा और मित्रों का सहयोग भी प्राप्त होगा। स्वजनों का भी सहयोग मिलेगा। पर्याप्त धन संपदा हाथ में होने के बावजूद कुछ पारिवारिक अशांति रहेगी।

मकर: पराक्रम भाव और पुरूषार्थ की योजनाएं बनेंगी और मित्रों का सहयोग बना रहेगा। किसी चल या अचल संपत्ति का पारिवारिक विवाद निपटाना आवश्यक होगा।

कुंभ: किसी पर व्यर्थ के संदेह और तर्क-वितर्क में समय और धन की हानि होगी। नियोजित कार्यक्रम भी सफल होंगे और आर्थिक लाभ का सुअवसर भी आएगा। पितृपक्ष से लाभ की आशा रहेगी।


मीन: आर्थिक मसलों में सोच समझ कर किए गए निवेश अत्यधिक फायदा दे सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपको थोड़ा सोच समझकर ही कोई भी फैसला लेना चाहिए। विदेश संबंधी कार्यों व संतान पर अनावश्यक पैसा खर्चा हो सकता है।
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18 मई 2018, शुक्रवार का राशिफल !!

#मेष

थोड़े प्रयास से ही कार्य बनेंगे। कार्य की प्रशंसा होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। जल्दबाजी न करें। प्रसन्नता रहेगी।


#वृष

अतिथि आगमन होगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। विवाद को बढ़ावा न दें। मान बढ़ेगा। प्रसन्नता रहेगी।


#मिथुन

प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। बेरोजगारी दूर होगी, प्रयास करें। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है।


#कर्क

वस्तुएं संभालकर रखें। फालतू खर्च होगा। जोखिम व जमानत‍ के कार्य टालें। क्रोध पर नियंत्रण रखें।


#सिंह

रुका हुआ धन प्राप्त होगा। चोट व रोग से बचें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। धनार्जन होगा।


#कन्या

भय रहेगा। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। नई नीति बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। व्यवसाय ठीक चलेगा।

#तुला

भागदौड़ रहेगी। बेचैनी रहेगी। शारीरिक कष्ट संभव है। पूजा-पाठ में मन लगेगा। सुख के साधन जुटेंगे। प्रमाद न करें।


#वृश्चिक

पुराना रोग उभर सकता है। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। क्रोध पर नियंत्रण रखें। विवाद न करें।

#धनु

अज्ञात भय सताएगा। प्रेम-प्रसंग में सावधानी रखें। कानूनी अड़चन दूर होगी। व्यवसाय ठीक चलेगा।


#मकर

शारीरिक कष्ट से बाधा संभव है। शत्रु भय रहेगा। भूमि व भवन संबंधी बाधा दूर होकर लाभ होगा।


#कुंभ

पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा।


#मीन

मेहनत अधिक होगी। शोक समाचार मिल सकता है। उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। व्यवसाय धीमा चलेगा
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A brief description of Navagraha !!

#Surya (Sun): He is the Sun god, also called Ravi. In the company of the other planets, he generally stands in the center facing east, while the other planets stand around him in eight different directions, but none facing each other. He rides a chariot that has one wheel and pulled by seven while horses. The seven horses symbolically represent the seven colors of the white light and the seven days of the week.

#Chandra (Moon): Also knows as Soma, and probably because of his waxing and waning qualities, in the images he is never depicted in full. We see him with only his upper body from chest upwards, with two hands holding one lotus each, riding upon a chariot drawn by 10 horses.

#Mangala (Mars): Also called Angaraka (Fire), Mangala is a ferocious god with four hands. In two hands he holds weapons, generally a mace and a javelin, while the other two are held in abhaya and varada mudras. He uses ram as his vehicle.

#Budha (Mercury): We generally see him depicted with four hands, riding upon a chariot or a lion. Three of his hands hold a sword, a shied and a mace respectively, while the fourth one is held in the usual varada mudra (giving gesture).

#Brihaspathi (Jupiter): Brihaspati also known as Brahmanaspati is the teacher of gods and is praised in many hymns of the Rigveda. He is generally shown with two hands, seated in a chariot driven by eight horses. The eight horses probably represent eight branches of knowledge.

#Shukra (Venus): Shukra is the teacher of the demons and the author of Sukraniti. He is generally shown with four hands, riding upon a golden or a silver chariot drawn by eight horses. Three of his hands hold a staff, a rosary, a vessel of gold respectively while the fourth one is held in varada mudra

#Shani (Saturn): Sani is a turbulent and troublesome god who makes and breaks fortunes by his influence and position in the planetary system for which he is invariably feared and especially worshipped by those who believe in Hindu astrology. He is generally shown with four hands riding upon a chariot, or a buffalo or a vulture. In three hands he shown holding an arrow, a bow and a javelin respectively while the fourth one is held in varadamudra.

#Rahu: His image resembles that of Budha (Mercury) in some respects but both gods differ fundamentally in their nature and temperament. He is generally shown riding a dark lion, in contrast to the white lion of Budha. But just like the other god, he carries the same weapons, namely a sword, a javelin and a shield in his three hands, while his fourth hand is held in varadamudra.

#Ketu: In Sanskrit Ketu (Dhuma ketu) means comet. The scriptures describe him as having the tail of a serpent as his body, a description which very much matches with his connection to the image of a comet. However in the images, he is usually shown with a poke marked body, riding upon a vulture and holding a mace.
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Thursday, May 17, 2018

घर परिवार में सुख समृद्धि के लिए प्रत्येक शुक्रवार पढ़ी जाने वाली लक्ष्मी व्रत कथा !!

इस व्रत को स्त्री या पुरुष, कोई भी कर सकता है. इस व्रत को करने से उपासक को धन और सुख-समृ्द्धि की प्राप्ति होती है. घर-परिवार में लक्ष्मी का वास बनाए रखने के लिए भी यह व्रत उपयोगी है. इस दिन स्त्री-पुरुष लक्ष्मी की पूजा करते हुए सफेद फूल, सफेद चंदन आदि से पूजा करते हैं. खीर से भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं. इस व्रत के दिन उपासक को एक समय भोजन करना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति माता वैभव लक्ष्मी का व्रत करने के साथ ही लक्ष्मी श्री यंत्र को स्थापित कर उसकी नियमित रूप से पूजा करता है, तो उसके व्यापार में वृ्द्धि ओर धन में बढोतरी होती है.

वैभव लक्ष्मी व्रत की कथा:

किसी शहर में अनेक लोग रहते थे. सभी अपने-अपने कामों में लगे रहते थे. किसी को किसी की परवाह नहीं थी. भजन-कीर्तन, भक्ति-भाव, दया-माया, परोपकार जैसे संस्कार कम हो गए. शहर में बुराइयां बढ़ गई थीं. शराब, जुआ, रेस, व्यभिचार, चोरी-डकैती वगैरह बहुत से गुनाह शहर में होते थे. इनके बावजूद शहर में कुछ अच्छे लोग भी रहते थे.

ऐसे ही लोगों में शीला और उनके पति की गृहस्थी मानी जाती थी. शीला धार्मिक प्रकृति की और संतोषी स्वभाव वाली थी. उनका पति भी विवेकी और सुशील था. शीला और उसका पति कभी किसी की बुराई नहीं करते थे और प्रभु भजन में अच्छी तरह समय व्यतीत कर रहे थे. शहर के लोग उनकी गृहस्थी की सराहना करते थे.

देखते ही देखते समय बदल गया. शीला का पति बुरे लोगों से दोस्ती कर बैठा. अब वह जल्द से जल्द करोड़पति बनने के ख्वाब देखने लगा. इसलिए वह गलत रास्ते पर चल पड़ा फलस्वरूप वह रोडपति बन गया. यानी रास्ते पर भटकते भिखारी जैसी उसकी हालत हो गई थी. शराब, जुआ, रेस, चरस-गांजा वगैरह बुरी आदतों में शीला का पति भी फंस गया. दोस्तों के साथ उसे भी शराब की आदत हो गई. इस प्रकार उसने अपना सब कुछ रेस-जुए में गंवा दिया.

शीला को पति के बर्ताव से बहुत दुःख हुआ, किन्तु वह भगवान पर भरोसा कर सबकुछ सहने लगी. वह अपना अधिकांश समय प्रभु भक्ति में बिताने लगी. अचानक एक दिन दोपहर को उनके द्वार पर किसी ने दस्तक दी. शीला ने द्वार खोला तो देखा कि एक माँजी खड़ी थी. उसके चेहरे पर अलौकिक तेज निखर रहा था. उनकी आँखों में से मानो अमृत बह रहा था. उसका भव्य चेहरा करुणा और प्यार से छलक रहा था. उसको देखते ही शीला के मन में अपार शांति छा गई. शीला के रोम-रोम में आनंद छा गया. शीला उस माँजी को आदर के साथ घर में ले आई. घर में बिठाने के लिए कुछ भी नहीं था. अतः शीला ने सकुचाकर एक फटी हुई चद्दर पर उसको बिठाया.

मांजी बोलीं- क्यों शीला! मुझे पहचाना नहीं? हर शुक्रवार को लक्ष्मीजी के मंदिर में भजन-कीर्तन के समय मैं भी वहां आती हूं.' इसके बावजूद शीला कुछ समझ नहीं पा रही थी. फिर मांजी बोलीं- 'तुम बहुत दिनों से मंदिर नहीं आईं अतः मैं तुम्हें देखने चली आई.'

मांजी के अति प्रेमभरे शब्दों से शीला का हृदय पिघल गया. उसकी आंखों में आंसू आ गए और वह बिलख-बिलखकर रोने लगी. मांजी ने कहा- 'बेटी! सुख और दुःख तो धूप और छाँव जैसे होते हैं. धैर्य रखो बेटी! मुझे तेरी सारी परेशानी बता.'

मांजी के व्यवहार से शीला को काफी संबल मिला और सुख की आस में उसने मांजी को अपनी सारी कहानी कह सुनाई.

कहानी सुनकर माँजी ने कहा- 'कर्म की गति न्यारी होती है. हर इंसान को अपने कर्म भुगतने ही पड़ते हैं. इसलिए तू चिंता मत कर. अब तू कर्म भुगत चुकी है. अब तुम्हारे सुख के दिन अवश्य आएँगे. तू तो माँ लक्ष्मीजी की भक्त है. माँ लक्ष्मीजी तो प्रेम और करुणा की अवतार हैं. वे अपने भक्तों पर हमेशा ममता रखती हैं. इसलिए तू धैर्य रखकर माँ लक्ष्मीजी का व्रत कर. इससे सब कुछ ठीक हो जाएगा.'

शीला के पूछने पर मांजी ने उसे व्रत की सारी विधि भी बताई. मांजी ने कहा- 'बेटी! मां लक्ष्मीजी का व्रत बहुत सरल है. उसे 'वरदलक्ष्मी व्रत' या 'वैभव लक्ष्मी व्रत' कहा जाता है. यह व्रत करने वाले की सब मनोकामना पूर्ण होती है. वह सुख-संपत्ति और यश प्राप्त करता है.'

शीला यह सुनकर आनंदित हो गई. शीला ने संकल्प करके आँखें खोली तो सामने कोई न था. वह विस्मित हो गई कि मांजी कहां गईं? शीला को तत्काल यह समझते देर न लगी कि मांजी और कोई नहीं साक्षात्‌ लक्ष्मीजी ही थीं.

दूसरे दिन शुक्रवार था. सबेरे स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनकर शीला ने मांजी द्वारा बताई विधि से पूरे मन से व्रत किया. आखिरी में प्रसाद वितरण हुआ. यह प्रसाद पहले पति को खिलाया. प्रसाद खाते ही पति के स्वभाव में फर्क पड़ गया. उस दिन उसने शीला को मारा नहीं, सताया भी नहीं. शीला को बहुत आनंद हुआ. उनके मन में 'वैभवलक्ष्मी व्रत' के लिए श्रद्धा बढ़ गई.

शीला ने पूर्ण श्रद्धा-भक्ति से इक्कीस शुक्रवार तक 'वैभवलक्ष्मी व्रत' किया. इक्कीसवें शुक्रवार को माँजी के कहे मुताबिक उद्यापन विधि कर के सात स्त्रियों को 'वैभवलक्ष्मी व्रत' की सात पुस्तकें उपहार में दीं. फिर माताजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छबि को वंदन करके भाव से मन ही मन प्रार्थना करने लगीं- 'हे मां धनलक्ष्मी! मैंने आपका 'वैभवलक्ष्मी व्रत' करने की मन्नत मानी थी, वह व्रत आज पूर्ण किया है. हे मां! मेरी हर विपत्ति दूर करो. हमारा सबका कल्याण करो. जिसे संतान न हो, उसे संतान देना. सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य अखंड रखना. कुंआरी लड़की को मनभावन पति देना. जो आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत करे, उनकी सब विपत्ति दूर करना. सभी को सुखी करना. हे माँ! आपकी महिमा अपार है.' ऐसा बोलकर लक्ष्मीजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छबि को प्रणाम किया.

व्रत के प्रभाव से शीला का पति अच्छा आदमी बन गया और कड़ी मेहनत करके व्यवसाय करने लगा. उसने तुरंत शीला के गिरवी रखे गहने छुड़ा लिए. घर में धन की बाढ़ सी आ गई. घर में पहले जैसी सुख-शांति छा गई. 'वैभवलक्ष्मी व्रत' का प्रभाव देखकर मोहल्ले की दूसरी स्त्रियां भी विधिपूर्वक 'वैभवलक्ष्मी व्रत' करने लगीं.
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Wednesday, May 16, 2018

श्री साईं बाबा व्रत कथा और पूजन विधि !!

साईंबाबा के पूजन के लिए सभी दिनों में गुरुवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता हैं. साईं व्रत कोई भी कर सकतें हैं चाहे बच्चा हो या बुजुर्ग या महिला।

वैसे भी हम सभी जानते हैं कि साईं बाबा जात-पात को नहीं मानते थे और उनका कहना था कि इश्वर  तो एक ही  है. सबका मालिक एक।

ये व्रत कोई भी गुरूवार को साईं बाबा का नाम ले कर शुरू किया जा सकता. सुबह या शाम को साईं बाबा के फोटो की पूजा करना किसी आसन पर पीला या लाल कपडा बिछा कर उस पर साईं बाबा का फोटो रख कर स्वच्छ पानी से पोछ कर चंदन या कुमकुम का तिलक लगाना चाहिये और उन पर पीला फूल या हार चढाना चाहिये।

अगरबत्ती और दीपक जलाकर साईं व्रत की कथा पढ़ना चाहिये और साईं बाबा का स्मरण करना चाहिये और प्रसाद बाटना चाहिये प्रसाद में कोई भी फलाहार या मिठाई बाटी जा सकती है. अगर सं भव हो तो साईं बाबा के मंदिर में जाकर भक्तिभाव से बाबा के दर्शन करना चाहिए, और बाबा साईं के भजनों में भक्तिमय रहना चाहिए .

शिरडी के साई बाबा के व्रत की संख्या 9 हो जाने पर अंतिम व्रत के दिन पांच गरीब व्यक्तियों को भोजन और सामर्थ्य अनुसार दान देना चाहिए. इसके साथ ही साई बाबा की कृ्पा का प्रचार करने के लिये 7, 11, 21 साई पुस्तकें या साईं सत्चरित्र , अपने आस-पास के लोगों में बांटनी चाहिए. इस प्रकार इस व्रत को समाप्त किया जाता है।

साईं व्रत कथा :

कोकिला बहन और उनके पति महेशभाई शहर में रहते थे. दोनों में एक-दुसरे के प्रति प्रेम-भाव था, परन्तु महेशभाई का स्वाभाव झगडालू था. बोलने की तमीज ही न थी. लेकिन कोकिला बहन बहुत ही धार्मिक स्त्री थी, भगवान पर विश्वास रखती एवं बिना कुछ कहे सब कुछ सह लेती. धीरे-धीरे उनके पति का धंधा-रोजगार ठप हो गया. कुछ भी कमाई नहीं होती थी. महेशभाई अब दिन-भर घर पर ही रहते और अब उन्होंने गलत राह पकड़ ली. अब उनका स्वभाव पहले से भी अधिक चिडचिडा हो गया.

एक दिन दोपहर का समय था .एक वृद्ध महाराज दरवाजे पर आकार खड़े हो गए. चेहरे पर गजब का तेज था और आकर उन्होंने दल-चावल की मांग की. कोकिला बहन ने दल-चावल दिये और दोनों हाथों से उस वृद्ध बाबा को नमस्कार किया, वृद्ध ने कहा साईं सुखी रखे. कोकिला बहन ने कहा महाराज सुख मेरी किस्मत में नहीं है और अपने दुखी जीवन का वर्णन किया.

महाराज ने श्री साईं के व्रत के बारें में बताया 9 गुरूवार (फलाहार) या एक समय भोजन करना, हो सके तो बेटा साईं मंदिर जाना, घर पर साईं बाबा की 9 गुरूवार पूजा करना, साईं व्रत करना और विधि से उद्यापन करना भूखे को भोजन देना, साईं व्रत की किताबें 7, 11, 21 यथाशक्ति लोगों को भेट देना और इस तरह साईं व्रत का फैलाव करना. साईबाबा तेरी सभी मनोकामना पूर्ण करेंगे, लेकिन साईबाबा पर अटूट श्रद्धा रखना जरुरी है.

कोकिला बहन ने भी गुरुर्वार का व्रत लिया 9 वें गुरूवार को गरीबों को भोजन दिया से व्रत की पुस्तकें भेट दी .उनके घर से झगडे दूर हुए, घर में बहुत ही सुख शांति हो गई, जैसे महेशभाई का स्वाभाव ही बदल गया हो. उनका धंधा-रोजगार फिर से चालू हो गया. थोड़े समय में ही सुख समृधि बढ़ गई. दोनों पति पत्नी सुखी जीवन बिताने लगे एक दिन कोकिला बहन के जेठ जेठानी सूरत से आए. बातों-बातों में उन्होंने बताया के उनके बच्चें पढाई नहीं करते परीक्षा में फ़ेल हो गए है. कोकिला बहन ने 9 गुरूवार की महिमा बताई और कहा कि साईं बाबा के भक्ति से बच्चे अच्छी तरह अभ्यास कर पाएँगे लेकिन इसके लिए साईं बाबा पर विश्वास रखना ज़रूरी है. साईं सबको सहायता करते है. उनकी जेठानी ने व्रत की विधि बताने के लिए कहा. कोकिला बहन ने कहा उन्हें वह सारी बातें बताई जो खुद उन्हें वृद्ध महाराज ने बताई थी.

सूरत से उनकी जेठानी का थोड़े दिनों में पत्र आया कि उनके बच्चे साईं व्रत करने लगे है और बहुत अच्छे तरह से पढ़ते है. उन्होंने भी व्रत किया था और व्रत की किताबें जेठ के ऑफिस में दी थी. इस बारे में उन्होंने लिखा कि उनकी सहेली की बेटी शादी साईं व्रत करने से बहुत ही अच्छी जगह तय हो गई. उनके पडोसी का गहनों का डिब्बा गुम हो गया, अब वह महीने के बाद गहनों का डिब्बा न जाने कहां से वापस मिल गया. ऐसे कई अद्भुत चमत्कार हुए था.

कोकिला बहन ने साईं बाबा की महिमा महान है वह जान लिया था. हे साईं बाबा जैसे सभी लोगों पर प्रसन्न होते है, वैसे हम पर भी होना.
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Tuesday, May 15, 2018

Importance of WEDNESDAY in Astrology!!

बुधवार वणिक वार है । कोई भी व्यापार यदि बुधवार को प्रारंभ किया जाए तो उसमें सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं । वणिक वर्ग के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे बुधवार के दिन किसी को भी धन नहीं दें । बुधवार का दिन धन संग्रह के लिए है ना कि धन देने के लिए ।

 बुधवार का दिन बुध ग्रह से संबंधित है, जिसके अधिपति स्वयं लक्ष्मी नारायण विष्णु हैं । लक्ष्मी तभी प्रसन्न होंगी जब नारायण प्रसन्न रहेंगे । अत: बुधवार को किया गया धन संग्रह अधिक संमय तक स्थायी रहता है इसलिए धन की वृद्धि से जुड़े सभी कार्यों के लिए बुधवार सर्वश्रेष्ठ वार है ।

इस दिन किए जाने योग्य कार्य, बैंक में जमा खाता खुलवाना, बीमा करवाना, धन का आदान प्रदान करना, रुपेए पैसों का लेन देन करना, इन्वेस्टमेन्ट करना, गोदाम में माल भरना इत्यादि कार्य करने शुभ रहते हैं ।

यदि आप बुधवार के दिन किसी शुभ कार्य के लिए जा रहे हैं तो गणेश जी को मोदक प्रसाद के रूप में चढ़ाएं और फिर प्रसाद ग्रहण करके लक्ष्य की ओर निकलें। ऐसा करने पर आपके सभी कार्य समय पर पूर्ण होंगे और सफलता प्राप्त होगी।
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Monday, May 14, 2018

Solving Mystery of Moon through Astrology!!

 
Moon moves at the fastest pace of all planets. It rules the mind. Moon represents mother, mind, intelligence, good behaviour and pregnancy. Besides this, Moon also controls a person’s emotions. Moon is water element. All the liquids are under the influence of Moon.

Moon is friendly to Sun and Mercury. Moon is not an enemy to any planet. Moon is neutral towards Mars, Jupiter, Venus and Saturn. Moon is the Lord of Cancer sign. Moon is exalted in Taurus sign. It is debilitated in Scorpio sign. Moon rules North-Western direction. Among gemstones, it is associated with Pearl. Among other things, Moon is associated with white color and silver. Lucky numbers of Moon are 2, 11 and 20. Devi Durga, Lord Shiva, Parvati or Gauri should be worshipped to impress Moon.

Rice, milk, silver, pearl, curd, sugar crystals, white clothes, white flowers and sandalwood are donated for Moon. These things should be donated on Monday.

Characteristics of a person having Moon ascendant :

A person faces cough problem quite often if Moon is in the ascendant or if Moon is in its birth sign or if Moon is strong in the ascendant. Such a person is usually plump and has beautiful eyes. He has a restless mind...These symptoms usually depend on the strength or weakness of the Moon in a particular horoscope.

Some areas influenced by Moon :
Moon can be associated with left eye, throat, flesh, blood, breath, food pipe, pregnancy, uterus, urinary tract etc.

If Moon is weak or afflicted in the Kundali, it can create problems related to heart, lungs, asthma, loose motions, kidneys, jaundice, problems related to uterus, epidemics, sexual problems, loss of blood, sleep, itching, cold, swellings, fear of water, throat, swelling in lungs etc.

A person under the influence of Moon Rahu conjunction is usually restless...Disturbed Moon causes gynaecology issues in women with disturbance in their periodical circles.
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ज्योतिष के अनुसार सफलता किस में ? व्यापार अथवा नौकरी?


ज्योतिष के अनुसार सफलता किस में ? व्यापार अथवा नौकरी?
कैरियर के विषय में निर्णय लेते हैं उस समय अक्सर मन में सवाल उठता है कि व्यापार करना चाहिए अथवा नौकरी।
ज्योतिष विधान के अनुसार अगर कुण्डली में द्वितीय, पंचम, नवम, दशम और एकादश भाव और उन में स्थित ग्रह कमजोर हैं तो आपको नौकरी करनी पड़ सकती है!

यदि दशम भाव पीड़ित है, उस स्थिति में भी नौकरी करना ही लाभदायक रहता है।

इन भावों में अगर ग्रह मजबबूत हैं तो आप व्यापार सकते हें। कुंडली मे जितने ज्यादा राजयोग होंगे, उतनी ही ज़्यादा सफलता व्यापार में प्राप्त होगी।
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Saturday, May 12, 2018

गुरु ग्रह और विवाह !!



गुरु ग्रह और विवाह !!

किस भी जातक के विवाह के कारक ग्रह #गुरु और #शुक्र हैं।

किसी भी कुंडली में जब गुरु की पांचवीं, सातवीं और नौवीं दृष्टि लग्न पर या सप्तम भाव पर पड़ती है, तब विवाह का योग बनता है। लेकिन अगर गुरु वक्री हो या कुंडली में मांगलिक दोष हो या कुंडली में सप्तम भाव में शनि, सूर्य, राहु, मंगल, केतु ग्रह हो, तो कुंडली दूषित होती है।

इससे वैवाहिक सुख में कमी, विलंब से विवाह तथा विवाह के उपरांत भी कलह पूर्ण जीवन व्यतीत होता है।

MOTHER'S DAY, dedicated to the most valuable women of this world.



Today on 13th May is the MOTHER'S DAY, dedicated to the most valuable women of this world.

This day has a special relevance with #ASTROLOGY, which I will try to explain you.

Everyone always talks about their Sun sign, but the Moon too plays an important role in our lives.

The Moon in our personal astrology is the place that represents our feelings, peace, contentment and overall emotional satisfaction. Most importantly, our Moon and mother go hand in hand. It’s the planet that connects us most to our mother and discovering how it operates is a fascinating discovery...It also reflects our relationship with our Mother.

Moon Sign, or the astrological sign your Moon was living in when you were born, describes not only the way your emotions operate but how you can feel the most content emotionally.

The place (or astrological house) where your Moon is situated, describes where it is that you’ll go to seek comfort.

The combinations or aspects your Moon makes describes what other influences are working with (and against) your emotional satisfaction.

All three of these things are determined at the moment you’re born and will remain the same all your life – no matter the ups downs and all-arounds.

Stronger the Moon placed in a horoscope, Happier is the life of a Mother...If the Moon is weakly placed, Mother's life is struggling all through her life.

Most importantly, your Moon and Mother go hand in hand.

No matter what the particulars – we all began our lives with our mothers.  She nurtured, comforted, loved, listened and hugged us in the best way she knew how.  Everyone has a story about their mother and the Moon in our personal astrology represents it.

Mother’s Day is a time to celebrate the love we have for all of the mothers of the World.
There is no love greater than the love a mother has for her children. Even though she may not do everything perfectly – she does the best she can.  

She loves in the best way she knows how and will always give the most she can. From one mother to another, I’m wishing all my lovely mothers a very Happy Mother’s Day.

Being a mother is the best and hardest job ever imaginable.  Here’s to all you do every minute, of every day, all year ’round.

सूर्य ग्रह और ज्योतिषशास्त्र !!

                                                           



सूर्य ग्रह और ज्योतिषशास्त्र !!

सूर्य सम्पूर्ण जगत के पालक हैं । सूर्य के बिना जगत की कल्पना मात्र भी सम्भव नहीं है । देव ग्रहों की श्रेणी में आने वाले सूर्य स्वभाव से क्रूर माने जाते हैं । आत्मा के कारक सूर्य देव की उपासना का प्रचलन भारत में वैदिक कल से ही रहा है । जहाँ सूर्य प्रकाश के कारक हैं, वहीं इनके पुत्र शनि, अंधकार के कारक हैं।

ये पेट, आँख, हड्डियों, हृदय व चेहरे का प्रतिनिधित्व करते हैं । सूर्य सातवीं दृष्टि से देखते हैं व इनकी दिशा पूर्व है । सूर्य की महादशा छः वर्ष की होती है । कुंडली के दशम स्थान में सूर्य देवता (Sun Planet ) को दिशा बल मिलता है । 

चंद्र, मंगल, गुरु सूर्य देव के मित्र व शुक्र तथा शनी शत्रु की श्रेणी में आते हैं । ज्योतिष शास्त्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य को इष्ट देव माना जाता है । सिंह लग्न की कुंडली के इष्ट देव वृहस्पति देवता होते हैं । कृतिका , उत्तराशाढा व उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सूर्य देव से सम्बन्धित हैं । पिता के कारक सूर्य देवता मेष राशि में उच्च व तुला राशि में नीच के माने जाते हैं।

कुंडली मे सूर्य यदि अशुभ स्थिति में हो तो नेत्र, सिर, हड्डियों, पेट और हृदय आदि सम्बन्धित रोग उत्तपन्न होते हैं।


दिन – रविवार
रंग – लाल
अंक – 1
दिशा – पूर्व
राशिस्वामी – सिंह ( Leo )
नक्षत्र स्वामी – कृतिका, उत्तराशाढा, और उत्तराफाल्गुनी
रत्न – माणिक्य (Ruby)
धातु – सोना (Gold)
देव – शिव (Lord Shiva)
मित्र ग्रह – गुरु, चंद्र और मंगल
शत्रु ग्रह – शुक्र, शनि
उच्च राशि – मेष (Aries)
नीच राशि – तुला (Libra)
मूल त्रिकोण – सिंह (Leo)
महादशा समय – 6 वर्ष
सूर्य का बीज मन्त्र – ‘ॐ हृां हृौं सः सूर्याय नमः
सूर्य का मूल मंत्र – ॐ सूर्याय नम: